Monday, March 5, 2018

आंबेडकरवाद पृष्ठ संबंधित मसले आंबेडकरवाद डॉ॰ भीमराव आंबेडकर जी के आदर्शों,

[05/03, 9:24 p.m.] Jai Sree Ram: आंबेडकरवाद

पृष्ठ संबंधित मसले

आंबेडकरवाद डॉ॰ भीमराव आंबेडकर जी के आदर्शों, विश्वासोंhttps://chat.whatsapp.com/GAESnqaidGW9OKa9g9gCug एवं दर्शन से उदभूत विचारों के संग्रह को कहा जाता है, जो भारत के सामाजिक आन्दोलन के सबसे बड़े नेता थे। यह ऐसे उन सभी विचारों का एक समेकित रूप है जो आंबेडकर जी ने जीवन पर्यंत जिया एवं किया था। जब किसी व्यक्ति या संस्थान को आंबेडकरवादी कहकर संबोधित करते हैं तो उसका तात्पर्य होता है डॉ॰ भीमराव आंबेडकर जी द्वारा स्थापित मानवी मूल्यों एवं आदर्शों का अनुपालन करनेवाला होता है। आंबेडकरवाद डॉ॰ भीमराव आंबेडकर का दर्शन है।

डॉ॰ भीमराव आंबेडकर के क्रांतिकारी एवं मानवतावादी विचारों प्रभावित होकर लोग बौद्ध बन रहे हैं। आज देश के समस्त शोषित, पिछडो एवं पुरोगामी आधुनिक विचारों के लोग आंबेडकरवाद से प्रभावित हो रहे हैं।

आज आंबेडकरवाद भारत की सबसे शक्तिशाली विचारधारा बन रहा है, डॉ॰ भीमराव आंबेडकर जी के आंबेडकरवाद से प्रभावित उनके अनुयायीओं की संख्या अन्य सभी महापुरूषों के अनुयायीओं से कई अधिक है। आंबेडकरवाद को राष्ट्रवाद भी कहां जाता है।
[05/03, 9:26 p.m.] Jai Sree Ram: महार रेजिमेंट

भारतीय सेना की सबसे पुरानी रेजिमेंट में से एक

महार रेजिमेंट भारतीय सेना का एक इन्फैन्ट्री रेजिमेंट है। यद्यपि मूलतः इसे महाराष्ट्र के महार सैनिकों को मिलाकर बनाने का विचार था, किन्तु केवल यही भारतीय सेना का एकमात्र रेजिमेन्ट है जिसे भारत के सभी समुदायों और क्षेत्रों के सैनिकों को मिलाकर बनाया गया है।

महार रेजिमेन्टचित्र:Mahar Regimental Insignia.gif

The Regimental Insignia of the Mahar Regiment

सक्रिय1941–अभी तकदेश Indiaशाखाभारतीय सेनाप्रकारLine InfantryभूमिकाInfantryविशालता19 battalionsआदर्श वाक्ययश सिद्धिWar CryBolo Hindustan Ki Jai (Say Victory to India)सैनिक चिह्न1 Param Vir Chakra, 4 Maha Vir Chakra, 29 Vir Chakra, 1 Kirti Chakra, 12 Shaurya Chakra, 22 Vishisht Seva Medals and 63 Sena Medals.[1]बिल्लाRegimental InsigniaA pair of crossed Vickers medium machine guns, mounted on a tripod with a dagger. The dagger was initially the Pillar of Koregaon, where the combined British and Mahar troops defeated the overwhelming Peshwa Army. The pillar was subsequently removed and was replaced with a dagger.[1]
[05/03, 9:27 p.m.] Jai Sree Ram: अंतर्गतसंपादित करें

महार स्काउट्स और उनकी सेना किले में सैनिकों के रूप में मराठा राजा शिवाजी द्वारा भर्ती किए गए थे।[2][3] उनका एक बडा हिस्सा बनाने कंपनी के बम्बई सेना के छठे हिस्से मेंईस्ट इण्डिया कम्पनी कंपनी द्वारा भर्ती किए गए थे। बम्बई सेना उनकी बहादुरी और ध्वज के प्रति वफादारी के लिए महार सैनिकों इष्ट और इसलिए भी क्योंकि वे आंग्ल-मराठा युद्ध के दौरान पर भरोसा किया जा सकता है। वे कई सफलताओं हासिल की है, कोरेगांव की लड़ाई, जहां महारबहुल कंपनी सैनिकों को एक बहुत बड़ा पेशवा बाजीराव द्वितीय के नेतृत्व में पराजित में भी शामिल है। यह लड़ाई एक ओबिलिस्क, कोरेगांव स्तंभ है, जो भारतीय स्वतंत्रता जब तक महार रेजिमेंट के शिखर पर छापा रूप में जाना द्वारा मनाया गया। बम्बई सेना की महार सैनिकों ने 1857 के भारतीय विद्रोह] में कार्रवाई को देखा, और दो रेजिमेंटों (21 वीं और 27 वीं) में शामिल हो गए इस रेजिमेंट के ब्रिटीश युद्ध तहत विद्रोह "बोलो हिंदुस्तान की जय" है।
[05/03, 9:28 p.m.] Jai Sree Ram: संपादित करें
विद्रोह के बाद भारतीय सेना के ब्रिटिश अधिकारियों, विशेष रूप से जो प्रथम और द्वितीय अफगान युद्ध में सेवा की थी, मार्शल दौड़ सिद्धांत के लिए मुद्रा देने के लिए शुरू किया। यह सिद्धांत था कि कुछ भारतीय जातियों और समुदायों के बीच स्वाभाविक रूप से जंगी, और अधिक दूसरों की तुलना में युद्ध के लिए अनुकूल थे। इस सिद्धांत का एक प्रमुख प्रस्तावक लार्ड रॉबर्ट्स, जो नवंबर 1885 में कमांडर-इन-चीफ के भारतीय सेना के बन रहे अन्य समुदायों की हानि के लिए धीरे-धीरे भारतीय सेना के 'Punjabisation "था। महार सैनिकों के लिए अंतिम झटका, 1892 में आया जब यह "वर्ग रेजिमेंटों" संस्थान को भारतीय सेना में निर्णय लिया गया। महारों इन वर्ग रेजिमेंटों में शामिल नहीं थे, और यह अधिसूचित किया गया था कि महारों, कुछ अन्य वर्गों के साथ के बीच, अब भारतीय सेना में भर्ती हो गए थे। महार सैनिकों, जो 104 वायसराय कमीशन अधिकारी और गैर कमीशन अधिकारियों और सिपाहियों के एक मेजबान शामिल demobilized थे। इस घटना को एक सरकारी वे एक सौ से अधिक वर्षों के लिए काम किया था द्वारा अपनी वफादारी की एक विश्वासघात के रूप में महारों ने माना गया था।

1892-1941 संपादित करें
After the demobilisation of the Mahar troops, there were many attempts by the leaders of the Mahar community to persuade the Government to let them serve in the Army once again. Petitions to this effect were drafted by ex-soldiers such as Gopal Baba Walangkar in 1894, and Shivram Janba Kamble in 1904. These petitions were supported in principle by the politician and social reformer Gopal Krishna Gokhale, who was opposed to the Martial Races theory. They were also supported by the Indian National Congress, who were also opposed to the recruiting policies of the Army.

The recruitment policies of the British Indian Army continued until the beginning of the First World War in 1914. The War forced the Government to begin more broad-based recruiting, and the Mahars were at last allowed to enlist in the Army. One battalion of Mahar troops, the 111th Mahars was raised in the June 1917. However, the battalion did not see much service during the War, and in 1920 it was merged with the 71st Punjabis. Finally, the battalion was disbanded in March 1921, and the Mahars were once again demobilised.

The period between the wars saw increased efforts by the Mahars to persuade the government to let them enlist in the Army. One proponent of Mahar recruitment was Dr. B. R. Ambedkar, whose father, Sub. Maj. Ramji Maloji Sakpal had been a soldier in the British Indian Army. However, the proposed reorganisation of the Indian Army that was to occur in the 1930s was postponed because of a lack of funds in the Grea
[05/03, 9:30 p.m.] Jai Sree Ram: आंबेडकर जयंती

पृष्ठ संबंधित मसले

भीमराव अंबेडकर की जन्मतिथि

आंबेडकर जयंती या भीम जयंती डॉ॰ भीमराव आंबेडकरजिन्हें बाबासाहेब के नाम से भी जाना जाता है, के जन्म दिन १४ अप्रैल को तौहार के रूप में भारत समेत पुरी दुनिया में मनाया जाता है।[1] इस दिन को 'समानता दिवस' और 'ज्ञान दिवस' के रूप में भी मनाया जाता है, क्योंकी जीवन भर समानता के लिए संघर्ष करने वाले प्रतिभाशाली डॉ॰ भीमराव आंबेडकर को समानता के प्रतिक और ज्ञान के प्रतिक भी कहां जाता है। भीमराव विश्व भर में उनकेमानवाधिकार आंदोलन, संविधान निर्माण और उनकी प्रकांड विद्वता के लिए जाने जाते हैं और यह दिवस उनके प्रति वैश्विक स्तर पर सम्मान व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है।

डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर जयंती
चैत्य भूमि में आंबेडकर जयंतीअन्य नामभीम जयंतीअनुयायीभारत एवं +65 देशों मेंप्रकारSecular; डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर का जन्म दिवसउत्सवउत्सवतिथि14 अप्रेलFrequencyवार्षिकसमान पर्वअशोक विजयादशमी

उनके जन्मदिन पर हर साल उनके लाखों अनुयायी उनके जन्मस्थल महू (मध्य प्रदेश), बौद्ध धम्म दीक्षास्थलदीक्षाभूमि, नागपुर और उनका समाधी स्थल चैत्य भूमि, मुंबईमें उन्हें अभिवादन करने लिए इकट्टा होते है। सरकारी दफ्तरों और भारत के हर बौद्ध विहार में भी भीमराव की जयंती मनाकर उन्हें नमन किया जाता है। विश्व के 55 से अधिक देशों में डॉ॰ भीमराव आंबेडकर की जयंती मनाई जाती है।

गुगल ने डॉ॰ आंबेडकर की 124 वी जयंती 2015 पर अपने 'गुगल डुडल' पर उनकी तस्वीर लगाकर उन्हें अभिवादन किया।[2][3][4] तीन महाद्विपों के देशों में यह डुडल था।
[05/03, 9:31 p.m.] Jai Sree Ram: १२५वी आंबेडकर जयंतीसंपादित करें

इस साल २०१६ में भारत सरकार ने बड़े पैमाने पर भीमराव की १२५वी जयंती मनाई गई। संयुक्त राष्ट्र ने भी पहली बार डॉ॰ आंबेडकर की १२५ वी जयंती मनाई जिसमें १५६ देशों के प्रतिनिधीयों ने भाग लिया था। संयुक्त राष्ट्र नेे डॉ॰ आंबेडकर जी को विश्व का प्रणेता कहकर उनका गौरव किया।[5] संयुक्त राष्ट्र के ७० वर्ष के इतिहास में वहां पहली बार भारतीय व्यक्ति डॉ॰ भीमराव आंबेडकर जी की जयंती मनाई गई, भीमराव के अलावा विश्व में केवल दों ऐसे महापुरूष हैं जिनकी जयंती संयुक्त राष्ट्र ने मनाई हैं – मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला।[6] भीमराव, किंग और मंडेला ये तीनों महापुरूष मानवाधिकार संघर्ष के सबसे महान नेता रहे हैं।

आंबेडकर जयंती 2016 पूरे भारत एवं अन्य कई देशों के लोगों द्वारा 14 अप्रैल, गुरूवार को मनाया गया।
[05/03, 9:32 p.m.] Jai Sree Ram: डॉ॰ आंबेडकर का जन्म दिवससंपादित करें

भारत के लोगों के लिये बाबासाहेब डॉ॰ भीमराव अंबेडकर का जन्म दिवस और उनके योगदान को याद करने के लिये 14 अप्रैल को एक उत्सव से कहीं ज्यादा उत्साह के साथ लोगों के द्वारा अंबेडकर जयंती को मनाया जाता है। उनके स्मरणों को श्रद्धांजलि देने के लिये वर्ष 2017 में ये उनका 126 वाँ जन्मदिवस उत्सव होगा। ये भारत के लोगों के लिये एक बड़ा क्षण था जब वर्ष 1891 में उनका जन्म हुआ था।

इस दिन को पूरे भारत वर्ष में सार्वजनिक अवकाश के रूप में घोषित किया गया। नयी दिल्ली, संसद में उनकी मूर्ति पर हर वर्ष भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री (दूसरे राजनैतिक पार्टियों के नेताओं सहित) द्वारा सदा की तरह एक सम्माननीय श्रद्धांजलि दिया गया। अपने घर में उनकी मूर्ति रखने के द्वारा भारतीय लोग एक भगवान की तरह उनकी पूजा करते हैं। इस दिन उनकी मूर्ति को सामने रख लोग परेड करते हैं, वो लोग ढोल बजाकर नृत्य का भी आनन्द लेते हैं।
[05/03, 9:32 p.m.] Jai Sree Ram: आंबेडकर जयंती क्यों मनायी जाती हैसंपादित करें

भारत के लोगों के लिये उनके विशाल योगदान को याद करने के लिये बहुत ही खुशी से भारत के लोगों द्वारा अंबेडकर जयंती मनायी जाती है। डॉ भीमराव अंबेडकर भारतीय संविधान के पिता थे जिन्होंने भारत के संविधान का ड्रॉफ्ट (प्रारुप) तैयार किया था। वो एक महान मानवाधिकार कार्यकर्ता थे जिनका जन्म 14 अप्रैल 1891 को हुआ था। उन्होंने भारत के निम्न स्तरीय समूह के लोगों की आर्थिक स्थिति को बढ़ाने के साथ ही शिक्षा की जरुरत के लक्ष्य को फैलाने के लिये भारत में वर्ष 1923 में “बहिष्कृत हितकरनी सभा” की स्थापना की थी। इंसानों की समता के नियम के अनुसरण के द्वारा भारतीय समाज को पुनर्निर्माण के साथ ही भारत में जातिवाद को जड़ से हटाने के लक्ष्य के लिये “शिक्षित करना-आंदोलन करना-संगठित करना” के नारे का इस्तेमाल कर लोगों के लिये वो एक सामाजिक आंदोलन चला रहे थे।

अस्पृश्य लोगों के लिये बराबरी के अधिकार की स्थापना के लिये महाराष्ट्र के महाड में वर्ष 1927 में उनके द्वारा एक मार्च का नेतृत्व किया गया था जिन्हें “सार्वजनिक चॉदर झील” के पानी का स्वाद या यहाँ तक की छूने की भी अनुमति नहीं थी। जाति विरोधी आंदोलन, पुजारी विरोधी आंदोलन और मंदिर में प्रवेश आंदोलन जैसे सामाजिक आंदोलनों की शुरुआत करने के लिये भारतीय इतिहास में उन्हें चिन्हित किया जाता है। वास्तविक मानव अधिकार और राजनीतिक न्याय के लिये महाराष्ट्र के नासिक में वर्ष 1930 में उन्होंने मंदिर में प्रवेश के लिये आंदोलन का नेतृत्व किया था। उन्होंने कहा कि दलित वर्ग के लोगों की सभी समस्याओं को सुलझाने के लिये राजनीतिक शक्ति ही एकमात्र तरीका नहीं है, उन्हें समाज में हर क्षेत्र में बराबर का अधिकार मिलना चाहिये। 1942 में वाइसराय की कार्यकारी परिषद की उनकी सदस्यता के दौरान निम्न वर्ग के लोगों के अधिकारों को बचाने के लिये कानूनी बदलाव बनाने में वो गहराई से शामिल थे।

भारतीय संविधान में राज्य नीति के मूल अधिकारों (सामाजिक आजादी के लिये, निम्न समूह के लोगों के लिये समानता और अस्पृश्यता का जड़ से उन्मूलन) और नीति निदेशक सिद्धांतों (संपत्ति के सही वितरण को सुनिश्चित करने के द्वारा जीवन निर्वाह के हालात में सुधार लाना) को सुरक्षा देने के द्वारा उन्होंने अपना बड़ा योगदान दिया। बुद्ध धर्म के द्वारा अपने जीवन के अंत तक उनकी सामाजिक क्रांति जारी रही। भारतीय समाज के लिये दिये गये उनके महान योगदान के लिये 1990 के अप्रैल महीने में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
[05/03, 9:33 p.m.] Jai Sree Ram: आंबेडकर जयंती कैसे मनायी जाती हैसंपादित करें

पूरे भारत भर में वाराणसी, दिल्ली सहित दूसरे बड़े शहरों में बेहद जुनून के साथ अंबेडकर जयंती मनायी जाती है। कचहरी क्षेत्र में डॉ अंबेडकर जयंती समारोह समिति के द्वारा डॉ अंबेडकर के जन्मदिवस उत्सव के लिये कार्यक्रम वाराणसी में आयोजित होता है। वो विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करते हैं जैसे चित्रकारी, सामान्य ज्ञान प्रश्न-उत्तर प्रतियोगिता, चर्चा, नृत्य, निबंध लेखन, परिचर्चा, खेल प्रतियोगिता और नाटक जिसके लिये पास के स्कूलों के विद्यार्थीयों सहित कई लोग भाग लेते हैं। इस उत्सव को मनाने के लिये, लखनऊ में भारतीय पत्रकार लोक कल्याण संघ द्वारा हर वर्ष एक बड़ा सेमीनार आयोजित किया जाता है।
[05/03, 9:34 p.m.] Jai Sree Ram: आंबेडकर जयंती कहां मनाई हैंसंपादित करें

आंबेडकर जयंती संपूर्ण विश्व में मनाई जाती हैं। अधिकांश रूप से आंबेडकर जयंती भारत में मनाई जाती है, भारत के हर राज्य में, राज्य के हर जिले में और जिले के लाखों गावों में मनाई जाती हैं। भारतीय समाज, लोकतंत्र, राजनिती आदी में भीमराव आंबेडकर का गहरा प्रभाव पड़ा हैं।

डॉ॰ भीमराव आंबेडकर जी का जन्मदिवस या जयंती मनाने वाले देश

भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रिया, बहरीन, ब्राज़ील, डेनमार्क,बांग्लादेश, मिस्र, जर्मनी, ग्वाटेमाला, हांगकांग, इंडोनेशिया,इराक, आयरलैण्ड, सउदी अरब, दक्षिण आफ़्रिका, जापान,मेडागास्कर, मंगोलिया, नेपाल, ओमान, फ़्रान्स, श्रीलंका,सेशेल्स, दक्षिण सूडान, स्पेन, स्विट्ज़रलैण्ड, तंज़ानिया,संयुक्त राजशाही (ग्रेट ब्रिटेन, लंदन), युक्रेन, कनाडा, हंगरी,म्यान्मार, कुवैत, आस्ट्रेलिया, मलेशिया, न्यूज़ीलैण्ड,थाईलैण्ड, चीन, पाकिस्तान, दुबई, कैलिफ़ोर्निया, सैन फ्रांसिस्को आदी देश आंबेडकर जयंती मनाते हैं।[7][8][9][10][11][12][13][14][15][16][17]

६५ से अधिक देशों में हर वर्ष डॉ॰ आंबेडकर जी की जयंती मनाई जाती हैं।
[05/03, 9:34 p.m.] Jai Sree Ram: पहली बार संयुक्त राष्ट्र ने डॉ॰ भीमराव आंबेडकर की जयंती मनाई। संस्था के शीर्ष अधिकारी ने इन प्रख्यात भारतीय समाज सुधारक को हाशिए पर जी रहे लोगों के लिए ‘एक वैश्विक प्रतीक’ करार दिया और उनके विजन को पूरा करने के लिए भारत के साथ मिल कर काम करने की इस वैश्विक निकाय की कटिबद्धता प्रदर्शित की।

यूएनडीपी की प्रशासक हेलेन क्लार्क ने भारत के स्थायी मिशन द्वारा इस वैश्विक निकाय में डॉ॰ आंबेडकर की 125 वीं जयंती पर पहली बार आयोजित विशेष समारोह में अपने संबोधन में कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र में इस महत्त्वपूर्ण वर्षगांठ को मनाए जाने पर मैं संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की ओर से भारत की सराहना करती हूं।’

संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव पद के उम्मीदवारों में शामिल क्लार्क ने कहा, ‘हम वर्ष 2030 के एजंडे और दुनिया भर के गरीब एवं वंचित लोगों के लिए डॉ॰ आंबेडकर की सोच को हकीकत में बदलना सुनिश्चित करने के लिए भारत के साथ अपनी बेहद करीबी साझेदारी को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’

भारतीय संविधान के शिल्पी, दलित मसिहा, बोधिसत्व बाबासाहेब डॉ॰ भीमराव आंबेडकर की 125वीं जयंती 14 अप्रेल 2016, बुधवार को इस वैश्विक संस्था में मनाई गई थी। उसका आयोजन नागरिक समाज के समूहों कल्पना सरोज फाउंडेशन और फाउंडेशन आॅफ ह्यूमन होराइजन के साथ मिल कर किया गया। संयुक्त राष्ट्र विकास समूह की अध्यक्ष क्लार्क ने राजनयिकों, विद्वानों और डॉ॰ आंबेडकर के अनुयायियों को अपने संबोधन में कहा कि “यह अवसर ऐसे ‘बहुत महान व्यक्ति की विरासत’ को याद करता है, जिन्होंने इस बात को समझा कि ‘अनवरत चली आ रहीं और बढ़ती असमानताएं’ देशों और लोगों की आर्थिक और सामाजिक कल्याण के समक्ष मूल चुनौतियां पेश करती हैं।”

न्यूजीलैंड की पूर्व प्रधानमंत्री क्लार्क ने कहा कि “डॉ॰ भीमराव आंबेडकर के आदर्श आज भी उतने ही प्रासंग��
[05/03, 9:37 p.m.] Jai Sree Ram: जितने वे 60 साल पहले थे। वंचित समूहों के समावेश और सशक्तीकरण, श्रम कानूनों में सुधार और सभी के लिए शिक्षा को बढ़ावा देने पर आंबडेकर की ओर से किए गए काम ने उन्हें ‘भारत और अन्य देशों में हाशिए पर जी रहे लोगों के लिए प्रतीक बना दिया।”[18]

इस मौके पर संपोषणीय विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए असमानता से संघर्ष विषयक परिचर्चा का भी आयोजन किया गया जिसमें डॉ॰ आंबेडकर से जुड़ेकोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर स्टान कचनोवस्की और एसोसिएट प्रोफेसर अनुपमा राव एवं हार्वर्ड विश्वविद्यालय के विख्याता क्रिस्टोफर क्वीन ने हिस्सा लिया।

क्लार्क ने कहा कि, “अांबेडकर के विजन एवं कार्य का आधार असमानताएं एवं भेदभाव घटाना भी नए विकास एजंडे के मूल में है जिसे 2030 तक हासिल करने के प्रति विश्व ने कटिबद्धता दिखाई है। डॉ॰ भीमराव आंबेडकर को असमानताएं दूर करने के लिए जरूरी दूरगामी उपायों की गहरी समझ थी।”

भीमराव के व्यापक विकास लक्ष्यों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने डॉ॰ अंबेडकर की 125वीं जयंती मनाई है, और इस अवसर पर संरा से इस दिन को अंतरराष्ट्रीय समानता दिवस घोषित करने की मांग की गयी है।
[05/03, 9:37 p.m.] Jai Sree Ram: पंजाब असेंबली स्पीकर चरनजीत सिंह अटवाल ने अंबेडकर जयंती के अवसर पर कहा, ‘मेरा मानना है समानता के लिए बाबासाहेब का जीवनपर्यंत संघर्ष केवल भारत के लोगों के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए था।‘ इसलिए उनके लिए सच्चा सम्मान व श्रद्धांजलि यही होगा कि इस दिन को संयुक्त राष्ट्र ‘अंतरराष्ट्रीय समानता दिवस (World Equality Day)’ घोषित कर दे। न्यूजीलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री हेलेन क्लार्क ने कहा कि अंबेडकर के आदर्श आज के लिए मायने रखते हैं, संयुक्त राष्ट्र ने अपना सतत विकास लक्ष्य के कार्यक्रम को शुरू किया।

क्लार्क ने कहा, ‘ अंबेडकर असमानता के कारण अच्छे लोगों में बदलावों को समझा और संरा ने अपने लक्ष्य में असमानता को हटाने का निर्णय लिया है।‘ क्लार्क अब संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यकर्म की प्रमुख और आगामी चुनावों में संरा की जनरल सेक्रेटरी के लिए उम्मीदवार हैं। संरा में भारतीय मिशन के द्वारा पहली बार इस मौके को मनाए जाने का निर्णय लिया गया।

राजदूतों, अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों, शिक्षा क्षेत्र से लोगों के साथ अमेरिका में रह रहे भारतीयों समेत कुल 550 से अधिक लोग इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र के कांफ्रेंस रूम में उपस्थित थे। प्रवेश द्वार पर नर्तकों व ड्रम वादकों को अभिवादन के लिए रखा गया था। न्यूयार्क के बेगमपुरा कल्चरल असोसिएशन ने सुसज्जित अंबेडकर की प्रतिमा संयुक्त राष्ट्र को दिया।

राजदूतों, अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों, शिक्षा क्षेत्र से लोगों के साथ अमेरिका में रह रहे भारतीयों समेत कुल 550 से अधिक लोग इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र के कांफ्रेंस रूम में उपस्थित थे। प्रवेश द्वार पर नर्तकों व ड्रम वादकों को अभिवादन के लिए रखा गया था। न्यूयार्क के बेगमपुरा कल्चरल असोसिएशन ने सुसज्जित अंबेडकर की प्रतिमा संयुक्त राष्ट्र को दिया। कमानी ट्यूब्स की चेयरपर्सन, कल्पना सरोज का फाउंडेशन इस मौके के लिए को-स्पांसर कर रहा
[05/03, 9:38 p.m.] Jai Sree Ram: डॉ॰ आंबेडकर के योगदानसंपादित करें

डॉ॰ भीमराव अंबेडकर का भारत के विकास में बड़ा योगदान रहा है। एक अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री, शिक्षाविद् और कानून के जानकार के तौर पर अंबेडकर ने आधुनिक भारत की नींव रखी थी।[19]

निम्न वर्ग समूह के लोगों के लिये अस्पृश्यता के सामाजिक मान्यता को मिटाने के लिये उन्होंने काम किया। बॉम्बे हाई कोर्ट में वकालत करने के दौरान उनकी सामाजिक स्थिति को बढ़ाने के लिये समाज में अस्पृश्यों को ऊपर उठाने के लिये उन्होंने विरोध किया। दलित वर्ग के जातिच्युतता लोगों के कल्याण और उनके सामाजिक-आर्थिक सुधार के लिये अस्पृश्यों के बीच शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये ‘बहिष्कृत हितकरनी सभा’ कहे जाने वाले एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। “मूक नायक, बहिष्कृत भारत और जनता समरुपता” जैसे विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन द्वारा उन्होंने दलित अधिकारों की भी रक्षा की
[05/03, 9:39 p.m.] Jai Sree Ram: उन्होंने एक सक्रिय सार्वजनिक आंदोलन की शुरुआत की और हिन्दू मंदिरों (1930 में कालाराम मंदिर आंदोलन) में प्रवेश के साथ ही जल संसाधनों के लिये अस्पृश्यता को हटाने के लिये 1927 में प्रदर्शन किया। दलित वर्ग के अस्पृश्य लोगों के लिये सीट आरक्षित करने के लिये पूना संधि के द्वारा उन्होंने अलग निर्वाचक मंडल की माँग की।15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता के बाद पहले कानून मंत्री के रूप में सेवा देने के लिये उन्हें काँग्रेस सरकार द्वारा आमंत्रित किया गया था। डॉ॰ अंबेडकर संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। उन पर आधुनिक भारत का संविधान बनाने की जिम्मेदारी थी और उन्होंने एक ऐसे संविधान की रचना की जिसकी नज़रों में सभी नागरिक एक समान हों, धर्मनिरपेक्ष हो और जिस पर देश के सभी नागरिक विश्वास करें। एक तरह से भीमराव अंबेडकर ने आज़ाद भारत के DNA की रचना की थी। उन्होंने भारत के नये संविधान का ड्रॉफ्ट तैयार किया जिसे 26 नवंबर 1949 में संवैधानिक सभा द्वारा अंगीकृत किया गया।
[05/03, 9:39 p.m.] Jai Sree Ram: भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना में इन्होंने एक बड़ी भूमिका निभायी क्योंकि वो एक पेशेवर अर्थशास्त्री थे। अर्थशास्त्र पर अपने तीन सफल अध्ययनशील किताबों जैसे “प्रशासन और ईस्ट इंडिया कंपनी का वित्त, ब्रिटिश इंडिया में प्रान्तीय वित्त के उद्भव और रुपये की समस्या: इसकी उत्पत्ति और समाधान” के द्वारा हिल्टन यंग कमीशन के लिये अपने विचार देने के बाद 1934 में भारत के रिजर्व बैंक को बनाने में वो सफल हुये।इन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था की योजना में अपनी भूमिका निभायी क्योंकि कि उन्होंने अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की डिग्री विदेश से हासिल की थी। देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिये औद्योगिकीकरण और कृषि उद्योग की वृद्धि और विकास के लिये लोगों को बढ़ावा दिया। खाद्य सुरक्षा लक्ष्य की प्राप्ति के लिये उन्होंने सरकार को सुझाव दिया था। अपनी मूलभूत जरुरत के रूप में इन्होंने लोगों को अच्छी शिक्षा, स्वच्छता और समुदायिक स्वास्थ्य के लिये बढ़ावा दिया। इन्होंने भारत की वित्त कमीशन की स्थापना की थी।
[05/03, 9:39 p.m.] Jai Sree Ram: भारत के जम्मू कश्मीर के लोगों के लिये विशेष दर्जा उपलब्ध कराने के लिये भारतीय संविधान में अनुच्छेद 370 के खिलाफ थे। क्योंकि वे भारत के कानून मंत्री थे और उनके नजर में सब भारतीय एवं सब राज्य एकसमान थे।इसके अलावा डॉक्टर अंबेडकर की प्रेरणा से ही भारत के Finance Commission यानी वित्त आयोग की स्थापना हुई थी।डॉ॰ अंबेडकर के Ideas से ही भारत के केन्द्रीय बैंक की स्थापना हुई, जिसे आज हम भारतीय रिज़र्व बैंक के नाम से जानते हैं।दामोदर घाटी परियोजना, हीराकुंड परियोजना और सोन नदी परियोजना जैसे 8 बड़े बांधो को स्थापित करने में डॉ॰ अंबेडकर ने बड़ी भूमिका निभाई थी।भारत में Employment Exchanges की स्थापना भी डॉक्टर अंबेडकर के विचारों की वजह से हुई थी।

- भारत में पानी और बिजली के Grid System की स्थापना में भी डॉक्टर अंबेडकर का अहम योगदान माना जाता है।

भारत को एक स्वतंत्र चुनाव आयोग भी डॉ॰ भीमराव अंबेडकर की ही देन है।
[05/03, 9:40 p.m.] Jai Sree Ram: धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस

भारतीय बौद्ध का प्रमुख त्योहार

धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस भारतीय बौद्धों एक प्रमुख त्यौहार है। दुनिया भर से लाखों बौद्ध अनुयायि एकट्टा होकर हर साल १४ अक्टूबर के दिन इसे दीक्षाभूमि, महाराष्ट्र में मनाते है।

२० वीं सदी के मध्य में भारतीय संविधान के निर्माता,बोधिसत्व डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर ने अशोक विजयादशमी के दिन १४ अक्टूबर १९५६ को नागपुर में अपने ५,००,००० अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था। डॉ॰ आंबेडकर ने जहां बौद्ध धम्म की दीक्षा ली वह भूमि आज दीक्षाभूमि के नाम से जानी जाती है। डॉ॰ आंबेडकर ने जब बौद्ध धर्म अपनाया था तब बुद्धाब्ध (बौद्ध वर्ष) २५०० था। विश्व के कई देशों एवं भारत के हर राज्यों से बौद्ध अनुयायि हर साल दीक्षाभूमि, नागपुर आकर ‘धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस’ १४ अक्टूबर को एक उत्सव के रूप में मनाते है। यह त्यौहार व्यापक रूप से डॉ॰ आंबेडकर के बौद्ध अनुयायियों द्वारा मनाया जाता है।[1]

डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर ने यह दिन बौद्ध धम्म दीक्षा के चूना क्योंकि इसी दिन ईसा पूर्व ३ री सदी में सम्राट अशोक ने भी बौद्ध धर्म ग्रहन किया था। तब से यह दिवस बौद्ध इतिहास में अशोक विजयादशमी के रूप में जाना जाता था, डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर ने बीसवीं सदीं में बौद्ध धर्म अपनाकर भारत से लुप्त हुए धर्म का भारत में पुनरुत्थानकिया।[2]

इस त्यौहार में विश्व के प्रसिद्ध बौद्ध व्यक्ति एवं भारत के प्रमुख राजनेता भी सामिल रहते है।[3]

No comments:

SCM MUSIC PRESENT

Love Quotes for Husband

Love Quotes for Husband: इन रोमांटिक मैसेज के जरिए अपने पति से कीजिए प्यार का इजहार Love Quotes For husband In Hindi: अगर आप भी अपने पति को ...